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May 15, 2012

Poem - Itni Rang Birangi Duniya - Dr Kumar Vishwas (Video and Lyrics)


इतनी रंग बिरंगी दुनिया, 
दो आखों में कैसे आये | 
हमसे पूछो इतने अनुभव, 
एक कंठ से कैसे गाये |

ऐसे  उजले लोग मिले जो,
अन्दर से बेहद काले थे | 
ऐसे चतुर लोग मिले जो, 
मन से भोले भाले थे |
ऐसे धनी लोग मिले जो, 
कंगलो से भी जयादा रीते थे | 
ऐसे मिले फकीर जो, 
सोने के घट में पानी पीते थे |

मिले परायेपन से अपने, 
अपनेपन से मिले पराये |
हमसे पूछो इतने अनुभव, 
एक कंठ से कैसे गाये |

जिनको जगत विजेता समझा,   
मन के हारे धारे निकले |
जो हारे हारे लगते थे, 
अन्दर से ध्रुव तारे निकले |
जिनको पतवारें सौपी थी, 
वे भवरों के सूदखोर थे |
जिनको भावर समझ डरता था, 
आखिर वही किनारे निकले |

वे मंजिल तक क्या पहुंचेंगे, 
जिनको खुद रास्ता भटकाए |
हमसे पूछो इतने अनुभव, 
एक कंठ से कैसे गाये | 

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